Thursday, July 28, 2011

दिग्विजय सिंह का रिमोट कंट्रोल

सोनिया गाँधी ने सिर्फ दिग्विजय सिंह को ही क्यों हिंदू विरोधी बयान देने के लिए अधिकृत किया है ??

मित्रों आप सब के मन में आ रहा होगा की आखिर दिग्विजय सिंह ही क्यों हिंदू विरोधी बयान दिए जा रहे है ? मीडिया और फेसबुक पर दिग्विजय सिंह के बारे में बहुत कुछ लिखा जाता है . लेकिन बहुत कम लोगो को मालूम है कि दिग्विजय सिंह जो कुछ भी बोल रहे है ये वो खुद नहीं बोल रहे है बल्कि सोनिया और अहमद पटेल की जोड़ी एक बहुत ही सोची समझी राजनीती खेल रही है ..

दिग्विजय सिंह के मन में हिंदुत्व को लेकर बहुत ही सम्मान रहा है . ये हमेशा महाकाल के दर्शन करते है . और बहुत ही धार्मिक प्रवृति के रहे है . अभी कुछ दिन पहले इंदौर में बिख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी शताब्दी समारोह का आयोजन हुआ . उसमे दिग्गी राजा भी आये थे और मुरली मनोहर जोशी , इंदौर की बीजेपी सांसद सुमित्रा महाजन आदि लोग भी थे . मेरे बहुत से पत्रकार मित्र उस समारोह में हाज़िर थे . दिग्गी राजा ने मंच पर मुरली मनोहर जोशी और सुमित्रा महाजन का पैर छुए . और कहा की जब गुरूजी [ जोशी जी ] और सुमित्रा ताई है तो फिर मै क्या बोल सकता हूँ . अच्छा खासा समारोह चल रहा था . लेकिन तभी बीच में दिग्गी राजा में ब्लैक्बेर्री में ई मेल आया जिसे पढते ही उनके चहरे का रंग उड़ गया .. जैसे तैसे दिग्गी राजा मंच पर सिर्फ दो शब्द बोले और फिर उज्जैन पहुचे जहा उन्होंने एक लुक्खे की तरह सड़क पर एक पूर्व मुख्यमंत्री होने के गरिमा को तार तार कर दिया .

मेरे एक मित्र जो बड़े पत्रकार है और दिग्गी राजा को काफी समय से कवर करते रहे है उन्होंने दिग्गी राजा के पारिवारिक सूत्रों के हवाले से बतया की असल में सोनिया का दिग्गी राजा पर बहुत बड़ा दबाव है वो खुद ये सब नहीं करना चाहते .लेकिन उनको ब्लेकबेरी पर हर समय मेल कर दिया जाता है की आज क्या बोलना है .

मित्रों आप लोगो को शाहबानो केस याद होगा .जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे उन दिनों संसद में कांगेस का जबरजस्त बहुमत था .. बीजेपी के पास सिर्फ दो सीटें थी . फिर सुप्रीम कोर्ट ने उस समय शरियत के अस्तितव् पर सवाल खड़े कर दिए और शरियत को भारत में प्रतिबंधित कर दिया . उस समय कांग्रेस के नेता और मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने पुरे देश में इस पर काफी बवाल किया ,और उनका साथ अब्दुल गनी खा चौधरी .और अब्दुर रहमान अंतुले ने भरपूर दिया . जिससे कांग्रेस को मुस्लिम वोट खोने का डर हों गया और राजीव गाँधी ने जबरजस्त बहुमत के दम पर भारतीय इतिहास में पहली बार संसद का एक सत्र बुलाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रोक दिया . [संसद बहुमत से सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रोक या बदल सकती है ]

लेकिन उसका उल्टा नतीजा यह हुआ की पुरे देश में हिंदू जो उस समय बिखरे हुए थे अपने आपको इस देश में बेगाना महसूस करने लगे और संघ तथा बीजेपी के तरफ झुकने लगे फिर राजीव गाँधी ने हिन्दुओ को खुश करने के लिए राम जन्म भूमि का ताला खोलने का आदेश दिया .. लेकिन उस समय हिन्दुओ को लगने लगा कि कांग्रेस को सिर्फ मुस्लिम वोट की चिंता है इसलिए बाद के चुनावो में बीजेपी को खूब सीटें मिली ..

चूँकि उस समय मुस्लिम नेताओ ने खूब बयानबाजी की थी इसलिए हिन्दुओ को संगठित होने की प्रेरणा मिली ..

इसी घटना को ध्यान में रख कर सोनिया गाँधी के सलाहकार अहमद पटेल ने एक बहुत ही घिनौनी चाल चली . उन्होंने कांग्रेस के सारे मुस्लिम नेताओ को आदेश दिया की वे धर्म के बारे में कुछ नहीं बोलेंगे . फिर अहमद पटेल ने तलाश किया एक ऐसे आउट डेटेड नेता की जो हिंदू हों और हिन्दुओ के बारे में खूब अनाप सनाप बोले और हिन्दुओ को अपमानित करे . दिग्विजय सिंह को ये जिम्मेदारी दी गई . लेकिन पहले दिग्गी राजा ने स्पष्ट शब्दों में मना कर दिया . लेकिन सोनिया गाँधी , राहुल गाँधी और अहमद पटेल ने दिग्गी राजा पर बहुत दबाव डाला और उनको खूब समझया उनको उमा भारती की याद दिलाई गई बोला गया कि एक हिंदू साध्वी के कारण ही आप कि कुर्सी गयी .. बाद में उनको लालच दिया गया कि राहुल बाबा जब प्रधानमंत्री बनेंगे तब आपको गृह मंत्री बनाया जायेगा . फिर दिग्गी राजा तैयार हों गए .

असल में अहमद पटेल ही आज कांग्रेस चला रहे है . अभी मणिशंकर अय्यर ने भी कहा कि २३ वेलिंग्टन रोड पर जाने से ही कांग्रसियो का काम होगा . ये अहमद पटेल का घर है . सब जानते है कि सोनिया गाँधी सिर्फ पांचवी क्लास तक ही पढ़ी है ये बात लोक सभा के सचिव से एक आरटीआई के द्वरा पता चली है सोनिया के पास अपनी खुद कि बुद्धि के नाम पर कुछ नहीं है पहले सोनिया ने अपनी जिद पर सिर्फ ईसाई होने के कारण अजित जोगी को मुख्मंत्री बनाया उसने आज छतीसगढ में कांग्रेस का क्या हाल किया सब जानते है . इसलिए आज अहमद पटेल के मन के अंदर जितनी भी हिंदू विरोधी भावना कूट कूट कर भरी है वो सब आज बाहर आ रही है .. हिन्दुओ को समाप्त करने के लिए जो साम्प्रदायिकता हिंसा निवारण कानून बना है वो सिर्फ और सिर्फ अहमद पटेल के दिमाक की उपज है . कांग्रेस के कई बड़े नेताओ ने सोनिया गाँधी से इस बारे में आगाह किया लेकिन सोनिया ने अहमद पटेल से आगे किसी की नहीं सुनी .

अगर दिग्विज सिंह अपने मन से बोलते तो अब तक उनके उपर कुछ ना कुछ करवाई जरुर होती . लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता भी दबी जुबान से स्वीकार करते है की दिग्गी राजा के अन्दर जो पेन ड्राइव १० जनपथ में डाला जाता है उसे सिर्फ सोनिया या अहमद पटेल ही फोर्मेट कर सकते है क्योंकि दिग्विजय सिंह नहीं बल्कि उनके अंदर से सोनिया गाँधी बोल रही है .

दिग्विजय सिंह के बहाने सोनिया से एक तीर से कई शिकार किया है . कांग्रेस ने मुसलमानों को भी खुश कर दिया और हिन्दुओ को संगठित भी नहीं होने दिया .. आज जो दिग्गी राजा बोल रहे है अगर वही अहमद पटेल खुद बोलते तो आज नज़ारा दूसरा ही होता

कांग्रेस कहती है कि दिग्विजय सिंह के बयानों से उसका कोई लेना देना नहीं है ,तो उनको पार्टी से बाहर क्यों नहीं निकलती ?

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